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जल्दी बूढ़ा ना होना हो तो इस जगह जरूर जाये

यह सच है कि दुनिया में कोई भी बूढ़ा नहीं होना चाहता। हर किसी को अपनी जवान काया ही पसंद होती है। एक जगह ऐसी है, जहां से हमेशा जवान रहने का वरदान पाया जा सकता है। पहले हम आपको इस जगह के बारे में ही बताते हैं। दुनियाभर में आए दिन ऐसी कई जगहों की खोज होती रहती है, जहां के रहस्य चौंकाने वाले होते हैं। इसी क्रम में आज हम आपको प्रकृति की गोद में बसे एक पर्वत अरावली के रहस्य बताने जा रहे हैं।
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इतिहासकार मानते हैं कि अरावली रेंज के पास एक ज्वालामुखी है, लेकिन हजारों सालों से इस ज्वालामुखी में कोई विस्फोट नहीं हुआ है। राजस्थान और हरियाणा की सीमा पर अरावली रेंज में स्थित धोसी पहाड़ी ज्वालामुखी के मुहाने जैसी दिखती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस ज्वालामुखी को धोसी पहाड़ी के नाम से भी जाना जाता है।
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कहा जाता है कि इस पहाड़ी से आयुर्वेद के कई राज जुड़े हैं। अब आपको बताते हैं हमेशा जवान रहने वाले रहस्य के बारे में। दरअसल हमेशा जवान और खूबसूरत दिखने के लिए कायाकल्प नाम की औषधि की जरूरत होती है। यह ऐसी औषधि है, जिससे त्वचा तो अच्छी होती ही है स्वास्थ्य भी दिनों दिन बेहतर होता जाता है। यह औषधि भी यहां पाई जाती है।
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वैसे तो आयुर्वेद की सबसे महान खोज च्यवनप्राश को माना जाता है, लेकिन शायद ही आपको पता हो कि च्यवनप्राश भी धोसी पहाड़ी की ही देन है। धोसी पहाड़ी का रहस्य आज भी कायम है । आखिर इसमें ऐसा क्या है जो ज्वालामुखी होन के बावजूद हजारों सालों से इसमें कोई विस्फोट नहीं हुआ। महाभारत के अुनसार इस पहाड़ी की उत्पत्ति त्रेता युग में हुई थी।
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सबगुरु न्यूज। ऋषि अत्रि की पत्नी अनसूया ने अपनी तपस्या के द्वारा ब्रह्मा विष्णु और महेश को छोटे छोटे बच्चे बनाकर उनका लालन पालन करने लगी। ऋषि अत्रि ने तीनों ही बालकों का नामकरण संस्कार कर जगत पिता ब्रह्मा जी का नाम चन्द्र के रूप में तथा विष्णु जी को दत्तात्रेय व भगवान शिव को दुर्वासा नाम दिया। बालक दिनों दिन बड़े होने लगे और धीरे-धीरे उनके दीक्षा संस्कार हुए।
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सबगुरु न्यूज। विशाल पंडाल के विशाल आसन पर बैठी महाशक्ति भवानी को दैव, दानव और मानव सभी सिर झुका कर प्रणाम कर रहे थे। इतने में यमराज भी वहां पर सात सांडों पर सात काले मिट्टी के घड़े बांधे आ गए और महाशक्ति को प्रणाम किया। महाशक्ति बोलीं- हे यमराज इन घडों में क्या लेकर आए हो।
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