जयपुर। राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को विधानसभा में आश्वस्त किया कि प्रदेश के कई जिलों में सामने आई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कम्पनियों की गंभीर अनियमितताओं एवं फर्जीवाड़़े की जांच पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) से कराई जाएगी।
डॉ मीणा प्रश्नकाल में विधायक बाबू सिंह राठौड़ के पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बैंकों और बीमा कम्पनियों के फर्जीवाड़े सामने आए हैं। इससे किसानों को अपनी फसलों के नुकसान का पैसा नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि श्रीगंगानगर जिले के करणपुर में निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि बीमा कम्पनी के सर्वेयर ने इंटीमेशन फार्म पर किसान, कृषि पर्यवेक्षक और राजस्व अधिकारी के हस्ताक्षर स्वयं ही कर दिए। उन्होंने बताया कि कुल एक लाख 70 हजार फार्म की जांच में पाया गया कि 32 हजार इंटिमेशन फार्म ऐसे थे, जिनमें किसान का फसल खराबी जीरो प्रतिशत बताई थी, जबकि वास्तविक क्षति 50 से 70 प्रतिशत तक थी।
इससे किसानों के लगभग 128 करोड़ रुपये डूब गए। उन्होंने बताया कि रावला में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है तथा पुलिस द्वारा प्रकरण की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में क्षेमा इन्श्योरेन्स कम्पनी को प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है। केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर आगे इस कम्पनी को टेन्डर नहीं देने का आग्रह किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) में सुनवाई कर किसानों को 122 करोड़ रुपए का भुगतान दिलवाने के प्रयास किए जाएंगे।
डॉ मीणा ने बीमा कम्पनी द्वारा फर्जीवाड़े के एक और मामले की जानकारी देते हुए बताया कि सालासर में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) बैंक में किसानों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 71 खाते खोले गए। इन खातों में किसानों के नाम तथा उनके रिश्तेदारों के नाम एक जैसे थे। इनसे संबंधित अन्य कोई दस्तावेज बैंक के पास नहीं थे।
बैंक में फर्जी नामों से सेविंग अकाउण्ट खोलकर उसके आधार पर प्रीमियम काटने की प्रक्रिया चल रही थी। इस फर्जीवाड़े से केन्द्र एवं राज्य सरकार को नौ करोड़ रुपए का गलत भुगतान करना पड़ सकता था। इस मामले में एआईसी कम्पनी का नाम सामने आया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
डॉ मीणा ने बताया कि सांचौर, जालौर, चूरू, नागौर तथा बीकानेर में इस तरह की अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि शेरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी फसल खराबी कम बताने के प्रकरण सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों का खाता एवं आधार सत्यापित नहीं होने, बीमित कृषक की मृत्यु होने तथा नेफ्ट बाउन्स होने आदि कारणों से कुछ किसानों का बीमा क्लेम भुगतान लंबित है।
इन किसानों का खाता सत्यापन, आधार सत्यापन तथा उत्तराधिकार प्रमाण पत्र आदि के प्रमाणीकरण आदि कार्य शीघ्रता से करवाये जाने के लिए संबंधित जिला कलेक्टरों को निर्दशित कर दिया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शीघ्र ही भुगतान कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा रबी एवं खरीफ की फसल में किसानों को छह हजार 328 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम भुगतान किया गया है। इसमें से 188 करोड़ रुपए का भुगतान पिछली सरकार के समय से बकाया था।
इससे पहले राठौड़ के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत विधानसभा क्षेत्र शेरगढ़ में खरीफ 2020 से रबी 2024-25 तक, पात्र 659 किसानों की फसल बीमा पॉलिसियों के विरुद्ध 42.62 लाख रुपये की राशि का फसल बीमा क्लेम किसान का खाता एवं आधार सत्यापित न होने, नेफ्ट बाउंस होने एवं बीमित कृषक की मृत्यु आदि के कारण लंबित है। उन्होंने कहा कि फसल कटाई प्रयोगों पर बीमा कंपनियों द्वारा दर्ज आपत्तियों के कारण 23 फसल पटवार युग्म के प्रकरण राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार समिति में प्रक्रियाधीन है।
कृषि मंत्री ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र शेरगढ़ के बीमा कंपनियों द्वारा पात्र 659 किसानों के बैंक खाता सत्यापन करवाकर लंबित फसल बीमा क्लेम राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से डीजी क्लेम मॉडयूल के द्वारा वितरण प्रक्रियाधीन है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार समिति में लंबित 23 फसल पटवार युग्म निस्तारण भारत सरकार से तकनीकी उपज दिनांक 10 फरवरी 2026 को प्राप्त हो गई है। शीघ्र राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार समिति बैठक में प्रकरणों का निस्तारण कर दिया जाएगा।



