
जलालाबाद। विराट संत सम्मेलन में सन्त महापुरुषों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सदाचार, राष्ट्रभक्ति मातृभक्ति, पितृभक्ति, धार्मिकता, सामाजिकता, नैतिकता, आदि गुण मनुष्य में कूट कूट कर भरे होते है। इसी संस्कृति से पोषित राष्ट्रभक्ति मातृभक्ति, पितृभक्ति, धार्मिकता, सामाजिकता पैदा होती है।