
rss chief mohan bhagwat at rss convention in haridwar
देहरादून/हरिद्वार। हिन्दू समाज मानवता के सर्वश्रेष्ठ गुणों से भरा है। प्रतिस्पद्धा में वह सबसे आगे है परंतु सामूहिकता की भावना की कमी के चलते वह कमजोर समुदाय बनकर रह गया है। आज जरूरत है हिन्दू समाज अपने कदम को दूसरे से मिला कर चले और स्वयं में संगठन के भाव मजबूत करे तो वह इतिहास बदल सकता है। उसे अपने प्रबोधन के प्रकाश में अपने आचरण को ढालना होगा। आत्मगौरव के आधार पर अपने समाज को संगठित करना होगा। इस बात को डा. हेडगेवार और ततकालीन महापुरूषों ने महसूस किया था। तभी डाक्टर साहब ने आठ वर्षों की गंभीर चिंतन के बाद 1925 में संघ की स्थापना की।



